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मुल्तान की मिट्टी से दिल्ली की धूल तक: दरयागंज वाया बाज़ार फ़त्ते ख़ाँ
लेकिन मुल्तान और विभाजन की कहानी पहले सौ पृष्ठ में ही है। उसके बाद की कहानी दिल्ली की है, जहाँ विस्थापित हुए ये मुल्तानी अपनी नयी जिंदगी शुरू करते हैं। लेखक सुजाता ने बहुत बारीकी से धीरे-धीरे संवादों को मुल्तानी से हिंदी में बदल दिया है। सिवाय कुछ बुजुर्गों द्वारा गाहे-बगाहे कहावत के सभी दिल्ली की जबान बोल रहे हैं। उन्हें जब कोई पाकिस्तानी या पंजाबी कहता है, तो वे कहते हैं कि हम हिंदुस्तानी हैं।
18 Oct, 2026

जर्मनी में दक्षिणपंथी पार्टी की जीत: हिटलर की वापसी?
09 Sep, 2026

आइसलैंड का EU में आने से इंकार और मछली का व्यापार
01 Sep, 2026

Norway Diary: वह राजा जो कहता था — ईश्वर और अल्लाह को मानने वाले एक हैं
30 Aug, 2026
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