Praveen Kumar Jha
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Praveen Kumar Jha

प्रवीण कुमार झा नार्वे में रहते हैं। पेशे से डॉक्टर हैं, मन से लेखक। कई चर्चित किताबें प्रकाशित

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मुल्तान की मिट्टी से दिल्ली की धूल तक: दरयागंज वाया बाज़ार फ़त्ते ख़ाँ
Literature

मुल्तान की मिट्टी से दिल्ली की धूल तक: दरयागंज वाया बाज़ार फ़त्ते ख़ाँ

लेकिन मुल्तान और विभाजन की कहानी पहले सौ पृष्ठ में ही है। उसके बाद की कहानी दिल्ली की है, जहाँ विस्थापित हुए ये मुल्तानी अपनी नयी जिंदगी शुरू करते हैं। लेखक सुजाता ने बहुत बारीकी से धीरे-धीरे संवादों को मुल्तानी से हिंदी में बदल दिया है। सिवाय कुछ बुजुर्गों द्वारा गाहे-बगाहे कहावत के सभी दिल्ली की जबान बोल रहे हैं। उन्हें जब कोई पाकिस्तानी या पंजाबी कहता है, तो वे कहते हैं कि हम हिंदुस्तानी हैं।

18 Oct, 2026

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