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BRICS में विदेशी मेहमानों को शाकाहारी भोजन परोसने पर क्यों छिड़ा सियासी घमासान?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
BRICS में विदेशी मेहमानों को शाकाहारी भोजन परोसने पर क्यों छिड़ा सियासी घमासान?

भारतीय परंपरा में मेहमानों, विशेषकर विदेश से आए अतिथियों पर राजनीतिक, धार्मिक या पूर्वाग्रह से प्रेरित खान-पान थोपने की नहीं रही है।

BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित भव्य रात्रिभोज में केवल शाकाहारी व्यंजन परोसे जाने को लेकर आलोचकों ने सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा है। विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों को परोसे गए भोजन को लेकर नेताओं, पूर्व राजनयिकों और अन्य लोगों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। रात्रिभोज में पूरी तरह शाकाहारी व्यंजन परोसे जाने के बाद भोजन के चयन को लेकर बहस छिड़ गई है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भारत की 80 प्रतिशत आबादी मांसाहारी है और भारतीय मांसाहारी भोजन बेहद स्वादिष्ट है।


राहुल गांधी ने X पर ‘छोले-भटूरे’ की तस्वीर साझा करते हुए लिखा,

रिकॉर्ड के लिए बता दूं कि 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं। भारतीय मांसाहारी भोजन बेहद स्वादिष्ट है और मेरी बहन के बनाए छोले-भटूरे भी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की नाश्ते पर मेजबानी की।


इसके बाद उन्होंने कहा कि,

नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में राजनयिक आयोजनों में केवल शाकाहारी भोजन परोसना एक राजनीतिक संदेश बन गया है। सरकार खुद को उस मुखर हिंदुत्व के अगुआ के रूप में पेश करती रही है, जो शाकाहार को बढ़ावा देता है।

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपनी खान-पान संबंधी पसंद को देशवासियों पर थोपने की आदत पहले से ही गंभीर समस्या है।


पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर लिखा,

अब भाजपा ने एक कदम आगे बढ़कर दुनियाभर से आए गणमान्य व्यक्तियों पर भी अपनी पसंद थोप दी है। भारत एक समृद्ध, विविधतापूर्ण और अनेक प्रकार के व्यंजनों वाला देश है। यहां दुनिया के कुछ बेहतरीन मांसाहारी व्यंजन मिलते हैं, जिन्हें दुनियाभर के लोग पसंद करते हैं। फिर मोदी सरकार ने भारतीय संस्कृति के इस हिस्से को छिपाने का फैसला क्यों किया? क्या उसे उस विविधता पर शर्म आती है, जो भारत को उसकी पहचान देती है?”

पूर्व राजनयिक केसी सिंह ने कहा कि,

भारतीय परंपरा में मेहमानों, विशेषकर विदेश से आए अतिथियों पर राजनीतिक, धार्मिक या पूर्वाग्रह से प्रेरित खान-पान थोपने की नहीं रही है।

पूर्व राजनयिक केसी सिंह ने कहा,

अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी आधिकारिक रात्रिभोज में प्रधानमंत्री मोदी को बीफ परोस दें तो क्या होगा? ट्रंप का पसंदीदा भोजन हैमबर्गर है। यहां तक कि विदेशी मेहमानों को अच्छा भारतीय शाकाहारी भोजन भी नहीं परोसा गया।

शाकाहारी बनाम मांसाहारी भोजन की यह बहस उस समय और तेज हो गई, जब पश्चिम बंगाल में एक स्वंयभू बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी।

नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की इस टिप्पणी पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा,

मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए भोजन के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है। हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का आनंद लिया। ये व्यंजन स्वाद और पोषण की विविधता से भरपूर हैं तथा भारत की अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पूर्व सांसद और सेवानिवृत्त नौकरशाह जवाहर सरकार ने वर्ष 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सम्मान में आयोजित राजकीय रात्रिभोज का मेन्यू साझा किया। उन्होंने संकेत दिया कि केवल शाकाहारी भोजन परोसना एक तरह की राजनयिक भूल हो सकती है।

उन्होंने फेसबुक पर लिखा,

यह हमें प्रसिद्ध कहानी ‘लोमड़ी और सारस’ की याद दिलाता है। इसमें चालाक लोमड़ी सारस को भोजन पर बुलाती है और उथली प्लेट में सूप परोसती है, जिससे सारस के लिए उसे खाना असंभव हो जाता है।

उन्होंने आगे कहा,

दूसरी ओर मैं उस राजकीय रात्रिभोज के मेन्यू की एक प्रति साझा कर रहा हूं, जो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2010 में राष्ट्रपति ओबामा और उनके प्रतिनिधिमंडल को परोसा था। चूंकि उनमें से लगभग सभी मांसाहारी थे, इसलिए भोजन में भारत के शानदार शाकाहारी व्यंजनों के साथ-साथ प्रसिद्ध मांसाहारी पकवानों का भी अच्छा मिश्रण रखा गया था।

जवाहर सरकार ने दावा किया,

मोदी के सबसे महत्त्वपूर्ण मेहमान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और यूएई के क्राउन प्रिंस ने इस जबरन शाकाहारी बनाए गए रात्रिभोज में हिस्सा नहीं लिया। यह शर्मनाक है। प्रधानमंत्री मोदी पिछले 12 वर्षों से ऐसा कर रहे हैं—विदेशी मेहमानों को असहज करके अपने शाकाहारी समर्थकों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।”

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा,


क्या मैं एक बुरी सांसद कहलाऊंगी, अगर मैं ब्रिक्स नेताओं को यह मेन्यू छोड़ने और सुरक्षा अधिकारियों से नजदीकी करीम्स से बुर्रा कबाब मंगवाने की सलाह दूं?”

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रवक्ता और महाराष्ट्र के विधायक वारिस पठान ने एक्स पर लिखा, आप शाकाहार को बढ़ावा देना चाहते हैं तो जरूर दीजिए, लेकिन भारत की खान-पान की संस्कृति को केवल शाकाहारी मेन्यू तक सीमित मत कीजिए। हमें मेहमानों के सामने भारत के सभी स्वाद पेश करने चाहिए थे—मटन मसाला फ्राई, हैदराबादी बिरयानी, तंदूरी चिकन, बटर चिकन, गोवा की फिश करी और दूसरे प्रसिद्ध भारतीय व्यंजन।


” पठान ने लिखा,

दुनिया को बताइए कि भारत की विविधता केवल भाषाओं और संस्कृतियों में ही नहीं, बल्कि हमारी थाली में भी दिखाई देती है।