Sunday Special: अलादीन का डिजिटल चिराग, AI रिपोर्टर और आधुनिक पत्रकारिता
अब रिपोर्टर को खबरों की तलाश में धूप में मारे-मारे फिरने और जूतों के तलवे घिसने की कोई ज़हमत नहीं उठानी पड़ती।
आजकल हमारे पत्रकारों के चेहरों पर जो ताज़गी, चमक और बेफिक्री छाई है, उसे देखकर गुमान होता है कि शायद उनकी तनख्वाहें अचानक डबल हो गई हैं या नगरपालिका ने रातों-रात सड़कों के सारे गड्ढे भर दिए हैं। लेकिन अंदर की खबर यह है कि हमारे पत्रकार भाइयों के हाथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के रूप में अलादीन का ऐसा 'डिजिटल चिराग' लग गया है, जिसने स्थानीय पत्रकारिता को सनसनीखेज कम और स्टैंड-अप कॉमेडी ज़्यादा बना दिया है।
अब रिपोर्टर को खबरों की तलाश में धूप में मारे-मारे फिरने और जूतों के तलवे घिसने की कोई ज़हमत नहीं उठानी पड़ती, वह बस प्रेस क्लब में बैठा चाय की चुस्कियां लेता है, AI को एक प्रॉम्प्ट (Prompt) दे मारता है, और खबर तैयार! लेकिन समस्या यह है कि इस डिजिटल चिराग का जिन्न, हिंदी भाषा और हमारे स्थानीय हालात से उतना ही अनजान है, जितने हमारे नेता सच से, और शहर की सड़कें डामर से।
विदेशी या अंग्रेज़ी खबरों का अनुवाद तो अब एक अलग ही लेवल पर जा चुका है।
पिछले दिनों एक रिपोर्टर ने अंग्रेज़ी की खबर दी कि शेयर बाज़ार में "बुल मार्केट" (Bull Market) का रुझान है। AI ने इसका ऐसा शानदार और बेखौफ शाब्दिक अनुवाद किया कि अगले दिन अखबार की आठ कॉलम की सुर्खी थी: "मुंबई के बाज़ार में सांड घुस आया, व्यापारियों में भारी भगदड़!" पढ़ने वाले हैरान कि सांड ने शेयर मार्केट का क्या बिगाड़ा है और लोग उसे पकड़ने के बजाय सेंसेक्स क्यों चेक कर रहे हैं?
राजनीतिक खबरों का तो हाल ही मत पूछिए।
एक स्थानीय पार्षद ने मोहल्ले की एक नई खुली हुई नाली और गटर का उद्घाटन किया। पत्रकार ने तस्वीर के साथ AI को कमांड दी कि इसे ज़रा 'दमदार' बना दो। खबर छपी: "शहर के जूलियस सीज़र ने आज एक महान ऐतिहासिक खाई का उद्घाटन किया, जिसके बाद उनके राजनीतिक साम्राज्य में गंदगी का नया और शानदार अध्याय शुरू हुआ।" पार्षद सुबह से सिर पकड़कर बैठा है कि अखबार वाले ने मेरी तारीफ की है या मेरी राजनीतिक कब्र खोदी है?
अपराध की कवरेज अब स्थानीय कम और हॉलीवुड की सस्पेंस फिल्म ज़्यादा लगती है।
एक छोटी-सी खबर थी कि बस स्टैंड पर एक जेबकतरा पकड़ा गया जिसने एक यात्री के सौ रुपये चुराए थे। AI ने इसे यूं पेश किया: "शहर की वित्तीय प्रणाली पर साइबर हमला विफल! एक अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड ने नागरिक की जेब में घुसपैठ कर अर्थव्यवस्था को 100 रुपये का भारी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, हालांकि जनता के त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम (यानी धुलाई) ने इस वैश्विक साजिश को नाकाम कर दिया।" पुलिस वाले हैरान हैं कि इस गरीब जेबकतरे पर आईपीसी (IPC) की धारा लगाएं या सीधा देशद्रोह का मुकदमा ठोक दें!
खबरों तक तो फिर भी गनीमत था, अब तो अखबार के क्लासीफाइड विज्ञापन भी AI के रहमो-करम पर हैं।
शहर के एक मशहूर होटल मालिक ने विज्ञापन के लिए ऑपरेटर को पर्चा दिया: "हमारे पास लज़ीज़ हलीम और बिरयानी उपलब्ध है"। AI ने इसे 'प्रोफेशनल' बनाते हुए छापा: "आइए और हमारे मसालों की शानदार सिम्फनी (Symphony) का अनुभव कीजिए। हमारी हलीम कोई मामूली भोजन नहीं, बल्कि एक ऐसी उत्कृष्ट कृति है जो आपकी स्वाद कलिकाओं (Taste buds) को मंत्रमुग्ध कर आपको शाश्वत शांति प्रदान करेगी!"
ग्राहक दुकान पर आकर परेशानी से पूछ रहे हैं कि,
भाई साहब, ये 'स्वाद कलिकाएं' हलीम के साथ प्लेट में मिलेंगी या अलग से पार्सल लेनी पड़ेंगी?
एक डेंटिस्ट (Dentist) का सीधा-सादा विज्ञापन था: "यहां बिना दर्द दांत निकाले जाते हैं"। AI ने इसे इतनी हमदर्द और साहित्यिक हिंदी पहनाई कि विज्ञापन कुछ यूं बना-
"क्या आप अपने दांतों के दर्दनाक अज़ाब से मुक्ति चाहते हैं? आइए, हम आपके जर्जर दांतों को अत्यंत स्नेह, प्रेम और पेशेवर कौशल के साथ जड़ों से उखाड़ फेंकेंगे, ताकि आपकी मुस्कान पुनः खिल उठे!" मरीज़ डर कर वापस नीम की दातून पर आ गए हैं कि ये प्रेम और स्नेह से दांत उखाड़ना कैसा होता है भाई?
और तो और, 'जरूरत है रिश्ते की' कॉलम में एक सीधा-सादा संदेश था:-
लड़के के लिए घरेलू और सलीकेदार लड़की चाहिए।" AI ने इसे किसी मल्टीनेशनल कंपनी का जॉब इंटरव्यू बना दिया:- "एक अत्यंत डायनामिक और टैलेंटेड बायोलॉजिकल होमोसेपियन को एक ऐसी महिला पार्टनर की तलाश है जो न केवल किचन मैनेजमेंट की बेहतरीन प्रशासनिक क्षमताओं की मालिक हो, बल्कि जिसका विजन (Vision) और मिशन (Mission) हमारे पारिवारिक लक्ष्यों (Family Goals) के साथ शत-प्रतिशत सिंक (Sync) हो!"
लड़की वालों ने यह विज्ञापन पढ़कर रिश्ता भेजने के बजाय अपनी बेटी का सीवी (CV) और एक्सपीरियंस लेटर भेज दिया है।
AI को रोज़मर्रा के छोटे-मोटे मुद्दों को वैज्ञानिक और दार्शनिक रंग देने की भी बहुत बीमारी है। खबर थी कि बारिश से फलां वॉर्ड में सड़क पर गड्ढा पड़ा और एक मोटरसाइकिल सवार गिरकर मामूली घायल हो गया।
AI ने इसे इतना दर्दनाक बना दिया कि सुर्खी लगी:-
एक और युवा गुरुत्वाकर्षण से जंग हार गया, नागरिक मोटरसाइकिल समेत नगरपालिका के खोदे गए ब्लैक होल में गायब!" इसी तरह दो घंटे की लोड शेडिंग पर AI ने लेख मार दिया:- "शहर पर डार्क एजेस (Dark Ages) लौट आया है, रोशनी के फरिश्ते हमसे रूठ गए हैं और जनता गुफाओं के युग में वापस चली गई है।"
लेकिन AI ने पत्रकारिता में कैसी क्रांति ला दी है, इसका असली अंदाज़ा उस घटना से लगाइए जो हाल ही में एक प्रतिष्ठित अखबार के साथ हुई। रात की शिफ्ट में नींद के झोंकों और कॉपी-पेस्ट की जल्दबाज़ी में बेचारा रिपोर्टर AI का 'मासूम' डिस्क्लेमर हटाना भूल गया।
अगले दिन अखबार के पहले पन्ने पर खबर छपी:- "शहर में बढ़ती महंगाई और प्रशासन की नाकामी पर जनता का उग्र प्रदर्शन..." (नोट: एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लैंग्वेज मॉडल होने के नाते, मैं महंगाई पर व्यक्तिगत राय नहीं दे सकता, अलबत्ता आप मुझसे हैदराबादी बिरयानी की रेसिपी ज़रूर पूछ सकते हैं!)
जनता अब तक यह तय नहीं कर पा रही है कि इस सनसनीखेज़ खबर पर सरकार के खिलाफ मातम मनाएं, या अखबार बंद करके सीधे किचन में जाकर बिरयानी का मसाला तैयार करें!
Athar Kalim Ahmed/S.R.Husaini
महाराष्ट्र के अतहर कलीम अहमद और एस.आर.हुसैनी उर्दू समाचार पत्रों और विभिन्न वेबसाइट के लिए "आईना खाना" के नाम से हास्य और व्यंग्यात्मक कॉलम लिखते हैं।