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8 साल से जेल में बंद मोहम्मद साकिब को Delhi HC से मिली जमानत

TCN Desk TCN Desk | 8h ago · 5 min read
8 साल से जेल में बंद  मोहम्मद साकिब को Delhi HC से मिली जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में गिरफ्तार मोहम्मद साकिब उर्फ साकिब इफ्तेखार को जमानत दे दी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में गिरफ्तार मोहम्मद साकिब उर्फ साकिब इफ्तेखार को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपी करीब आठ साल से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद है, जबकि मुकदमा जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है।

Bar and Bench की एक रिपोर्ट के अनुसार, 14 सितंबर को जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने साकिब को जमानत देने का आदेश पारित किया। उसके खिलाफ 2018 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के कुल 120 गवाहों में से अब तक केवल 40 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई निकट भविष्य में पूरी होती दिखाई नहीं दे रही।


राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का आरोप है कि,

साकिब ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ नामक ISIS समर्थक समूह का सदस्य था। एजेंसी के मुताबिक, उसने प्रशिक्षण के लिए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों के साथ बैठकों की व्यवस्था करने और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के उद्देश्य से हथियार जुटाने में भूमिका निभाई थी।

Law Beat की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला वर्ष 2018 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 120बी, 121, 121ए और 122; गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम UAPA की धाराओं 17, 18, 18बी, 20, 38 और 39 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं 4 और 5 के तहत आरोप लगाए गए थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार,

साकिब पर ISIS समर्थक संगठन ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ के सदस्य होने का आरोप था। उस पर ISIS की विचारधारा का प्रचार करने और जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा का समर्थन करने का आरोप है। जांच एजेंसी ने दावा किया कि उसने स्थानीय आतंकवादियों की व्यवस्था करने के लिए जम्मू-कश्मीर के त्राल क्षेत्र में संपर्क स्थापित किए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने संपर्कों के माध्यम से हथियार जुटाने में भी उसकी भूमिका होने का आरोप लगाया गया। साकिब सह-आरोपी मोहम्मद अबसार के साथ जुलाई 2017 और जुलाई 2018 में जम्मू-कश्मीर गया था। इन यात्राओं का उद्देश्य प्रशिक्षण और हथियारों की खरीद के लिए आतंकवादियों से संपर्क स्थापित करना था। NIA ने अपने आरोपों के समर्थन में गवाहों के बयानों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और साकिब के आवास से हुई बरामदगी पर भरोसा किया।

साकिब के वकील ने दलील दी कि आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों के अनुसार भी अपीलकर्ता को आतंकी साजिश के मुख्य मॉड्यूल का हिस्सा नहीं बताया गया है। अधिक से अधिक उसे एक सीमित या बाहरी भूमिका निभाने वाला व्यक्ति माना जा सकता है।

वकील ने कहा कि,

साकिब के खिलाफ एकमात्र आरोप यह है कि वह जुलाई 2017 और जुलाई 2018 में आरोपी संख्या छह मोहम्मद अबसार के साथ कश्मीर गया था। वहां उसने अभियोजन पक्ष के गवाह संख्या 27 रियाज अहमद नजार से आतंकवादियों के साथ मुलाकात कराने का अनुरोध किया था। यह स्वीकार किया गया कि गवाह रियाज अहमद नजार साकिब को पहले से जानता था, क्योंकि दोनों ने उत्तर प्रदेश के एक ही मदरसे में पढ़ाई की थी। बचाव पक्ष ने कहा कि गवाह के पूरे बयान को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि साकिब ने न तो आतंकवादियों से मुलाकात कराने का अनुरोध किया और न ही ऐसी किसी मुलाकात में दिलचस्पी दिखाई।

जमानत का विरोध करते हुए NIA के विशेष लोक अभियोजक ने दलील दी कि आरोपों की गंभीरता औरआतंकी मॉड्यूल के सदस्यों को आपस में जोड़ने में साकिब की कथित भूमिका को देखते हुए उसे हिरासत में रखा जाना उचित है।

इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने साकिब की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। साकिब ने अपनी याचिका में दलील दी कि वह आतंकी साजिश के मुख्य मॉड्यूल में शामिल नहीं था और अधिकतम उसकी भूमिका एक सीमित या बाहरी सहयोगी की थी। वहीं, NIA ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि केवल मुकदमे में देरी को जमानत देने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि,

प्रथम दृष्टया गवाहों के बयान इतने गंभीर नहीं हैं कि साकिब की हिरासत को और लंबा किया जाए। अदालत ने माना कि उसके फोन से बरामद सामग्री गंभीर है, लेकिन फिलहाल यह उसकी लगातार हिरासत को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।

पीठ ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए कहा, “गवाहों के बयानों, अपीलकर्ता के खिलाफ आरोपों और विशेष रूप से उसकी लंबी कैद की अवधि को देखते हुए हमारा मानना है कि उसने जमानत पर रिहा किए जाने का मामला बनाया है।”

अदालत ने साकिब की जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। उसे मुकदमे में पेश होने या NIA कार्यालय में रिपोर्ट करने के लिए दिल्ली जाने के अलावा अपने गृह नगर हापुड़ से बाहर यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी। उसे हर पखवाड़े NIA के लखनऊ कार्यालय में उपस्थित होना होगा।

साकिब को अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा कराने का निर्देश भी दिया गया है। मुकदमा पूरा होने तक वह केवल एक मोबाइल फोन या लैंडलाइन का इस्तेमाल कर सकेगा। NIA और निचली अदालत को सात दिन पहले सूचित किए बिना वह अपना मोबाइल नंबर या निवास स्थान नहीं बदल सकेगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि साकिब सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से किसी भी प्रकार की “राष्ट्र-विरोधी सामग्री” साझा या प्रसारित नहीं करेगा।