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राजस्थान नगर निकाय चुनाव: बीजेपी के सीएम और पूर्व सीएम भी नहीं बचा सके अपना गढ़, कांग्रेस का धमाकेदार कमबैक

TCN Desk TCN Desk | 47m ago · 5 min read
राजस्थान नगर निकाय चुनाव: बीजेपी के सीएम और पूर्व सीएम भी नहीं बचा सके अपना गढ़, कांग्रेस का धमाकेदार कमबैक

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव के नतीजों से स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में भाजपा का जबरदस्त विरोध हो रहा है।

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव के नतीजों से स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में भाजपा का जबरदस्त विरोध हो रहा है। कई शहरों के निकायों के चुनाव के नतीजे में भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा है और वहीं कांग्रेस कैंप में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।

बीकानेर नगर निकाय में जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, वहीं जयपुर में भी कांग्रेस ने भाजपा का सारा खेल पलट दिया है। शहरी क्षेत्र जहां भाजपा का गढ़ मजहूत था वहां भी भाजपा कोई कमाल नहीं कर पाई। जयपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अजमेर नगर निगम के चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है। 80 में से 37 वार्ड में कांग्रेस, 32 में भाजपा के प्रत्याशी जीते। जबकि निर्दलीय 11 सीटों पर जीते हैं। दोनों दलों को बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय किंगमेकर बनेंगे।

अजमेर नगर निकाय चुनाव के रिजल्ट से भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। बीते 36 साल से यहां भाजपा का बोर्ड रहा है। अजमेर शहर से स्पीकर वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल की प्रतिष्ठा दांव पर थी। इसके बावजूद इस बार कांग्रेस से पार्टी पिछड़ गई। बोर्ड के लिए बहुमत का आंकड़ा 41 का है। कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए 4 और बीजेपी को 7 प्रत्याशियों की जरूरत है। ऐसे में निर्दलीयों को पाले में लाने के लिए दोनों ही दल ऐडी से चोटी का जोर लगाएंगी।

जयपुर नगर निगम में बीजेपी को बहुमत, 77 वार्डों में बीजेपी प्रत्याशी जीते। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में हुए मतदान की काउंटिंग चल रही है। कांग्रेस ने 48 और निर्दलीय ने 14 सीट पर जीत दर्ज की है। ऐसे में अब बीजेपी की बोर्ड बनता दिख रहा है।

वहीं बीजेपी के लिए एक बड़ी हार वार्ड 110 से जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल के रूप में सामने आई है। उनके सामने कांग्रेस से सुनीता मेठी थी। सुनीता पिछली बार के पार्षद अरविंद मेठी की पत्नी हैं। सुनीता मेठी ने उन्हें पछाड़ दिया। ज्योति खंडेलवाल एक भी बूथ पर नहीं जीती हैं।


जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों में से 99 के नतीजे घोषित हो चुके हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दोनों पार्टियों ने 44-44 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि 11 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे हैं। वार्ड 50 के बूथ नंबर 338 पर पुनर्मतदान होना है। इसके चलते इस वार्ड की मतगणना रोक दी गई है। पुनर्मतदान के बाद ही वार्ड 50 का परिणाम सामने आएगा।

राजस्थान नगर निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘आंधी’ उनके ही गृह ज़िले भरतपुर में दम तोड़ गई। भरतपुर की सभी 6 नगरपालिकाओं- बयाना, नदबई, उच्चैन, भुसावर, बैर और रूपवास में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। भरतपुर नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस से बुरी तरह हार गई है भाजपा।


राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। झालावाड़ नगरपरिषद के 45 वार्डों के चुनाव में हुई मतगणना में कांग्रेस को बहुमत मिला है। यहां भाजपा सिर्फ 13 सीट पर ही चुनाव जीत सकी। जबकि कांग्रेस ने 29 वार्डों में बहुमत के साथ जीत दर्ज की है। इसके अलावा एक आम आदमी पार्टी और 2 निर्दलीयों ने भी जीत दर्ज की है।
कानोता नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। कांग्रेस ने 11, बीजेपी ने 6 और निर्दलीय ने 3 वार्डों में बाजी मारी। वार्ड नंबर 2 से निर्दलीय और कांग्रेस प्रत्याशी के बराबर वोट आने से लॉटरी निकाली गई। जहां निर्दलीय प्रत्याशी के पाले में पासा पलटा और निर्दलीय प्रत्याशी की जीत दर्ज हुई।

जयपुर की 18 निकायों में से 12 में खंडित जनादेश देखने को मिला है। यहां निर्दलीय किंग मेकर बनेंगे। जयपुर जिले की शाहपुरा, बगरू, बस्सी, चाकसू, दूदू, जोबनेर, किशनगढ़ रेनवाल, मनोहरपुर, फागी, फुलेरा, सांभर और वाटिका नगर पालिका में बीजेपी और कांग्रेस में से किसी दल को बहुमत नहीं मिला है।

चुनाव नतीजों के बाद बीकानेर में बोर्ड की तस्वीर को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के खाते में 13 वार्ड और कांग्रेस ने 17 वार्डों में जीत दर्ज की। आरएलपी 1 और 5 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी। बोर्ड बनाने में निर्दलीयों की बड़ी भूमिका हो सकती है।

सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला नतीजा तो डिडवाणा जिले के परबतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर 13 का आया है। परबतसर नगर पालिका के नतीजे में बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चन्द को सिर्फ 1 वोट मिला है। खास बात यह है कि बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चन्द को परिवार के लोगों और समर्थकों ने भी वोट नहीं दिया। इसी वार्ड में NOTA को भी 1 वोट मिला और बीजेपी प्रत्याशी को भी 1 वोट मिला। यानी बीजेपी प्रत्याशी और NOTA का आंकड़ा बराबर रहा। परबतसर नगर पालिका से कांग्रेस की हिना खानम को 376 वोटों से जीत मिली है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निकाय चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान UGC कानून के कारण हुआ है। भाजपा की सवर्ण विरोधी मानसिकता के कारण पार्टी को शहरी क्षेत्रों में भारी हार का सामना करना पड़ा है।

जयपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों ही प्रमुख दलों ने पूर्ण बहुमत के साथ अपना बोर्ड बनाने का दावा किया है। हालांकि, कई वार्डों में निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों की मजबूत स्थिति ने मुकाबला बेहद दिलचस्प बना दिया है। जिला निर्वाचन आयोग द्वारा 15 कंट्रोल रूम और 150 से अधिक टेबलों के जरिए चरणबद्ध तरीके से परिणाम घोषित किए जा रहे हैं।

उधर, मतगणना और नतीजों के आधिकारिक ऐलान के काउंटडाउन के बीच जयपुर के बड़े रिसॉर्ट्स सियासी जंग का मुख्य केंद्र बन चुके हैं। मतदान खत्म होते ही बाड़ाबंदी में भेजे गए कांग्रेस और BJP प्रत्याशियों को केवल निगरानी में नहीं रखा गया है, बल्कि नतीजों के तुरंत बाद बनने वाले राजनीतिक समीकरणों के लिए बाकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है। बस्सी के एक रिसॉर्ट में ठहरे कांग्रेस प्रत्याशियों को वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट रहने और प्रलोभन से दूर रहने की सख्त नसीहत दी, तो वहीं बगरू के एक आलीशान होटल में मौजूद BJP प्रत्याशियों को 'हनुमान अंश' फिल्म दिखाकर और अंताक्षरी खिलाकर तनावमुक्त रखने की कोशिश की गई।

दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन मतगणना स्थल से लेकर बोर्ड बनाने तक की इस घेराबंदी के पीछे असली सवाल यह है कि क्या नतीजे आने के बाद दोनों पार्टियां अपने कुनबे को बगावत और सेंधमारी से बचा पाएंगी?