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राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई पर SC ने लगाई रोक

TCN Desk TCN Desk | 17 Aug, 2026 · 5 min read
राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई पर SC ने लगाई रोक

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा CBI-ED जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है

राहुल गांधी को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा कि वह कांग्रेस नेता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में फिलहाल आगे की कार्यवाही न करे।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी निर्देश दिया कि वे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज इस मामले में हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत कोई रिपोर्ट दाखिल न करें।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर किया और कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर, जिन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, के साथ-साथ सीबीआई और ईडी को नोटिस जारी किया। पीठ राहुल गांधी की ओर से हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई तक टाल दे।

सुनवाई की शुरुआत में सिब्बल ने कहा,

यह कानून में बिल्कुल अनसुनी प्रक्रिया है। यह एक तरह का विच-हंट है, जिसे कानून मान्यता नहीं देता। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी याचिकाकर्ता की ओर से बार-बार ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं।”

उन्होंने विग्नेश शिशिर के हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने के अधिकार (लोकस स्टैंडी) पर भी सवाल उठाया। सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी साख और पृष्ठभूमि का भी खुलासा नहीं किया। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि सीबीआई ने शिकायत की पुष्टि करने के अलावा कुछ नहीं किया है।

केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि अभी तक इस मामले में एजेंसियों की कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत से किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता चलता है, तो मामला बेहद गंभीर है।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि,

हम उससे संबंधित नहीं हैं… मान लीजिए कोई हत्या करता है तो पुलिस को अनुमति की जरूरत नहीं होती। लेकिन हमें जो दिखाई दे रहा है, और दोनों पक्षों की ओर से मिलने वाली सहायता के अधीन, यदि अदालत कोई निर्देश जारी करना चाहती है तो उससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

राहुल गांधी के खिलाफ हाई कोर्ट जाने वाले शिशिर ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हुए और उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया।

सिब्बल ने सीलबंद लिफाफे में चल रही प्रक्रिया के बावजूद मीडिया में खबरें आने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “दूसरी बात यह है कि यह सीलबंद लिफाफे की प्रक्रिया है। फिर अखबारों में रिपोर्ट कैसे आ रही हैं? यह सीलबंद प्रक्रिया है। जजों को पूछना चाहिए था कि यह जानकारी अखबारों तक कैसे पहुंची।”

इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीबीआई के जवाब पर असंतोष जताते हुए 20 जुलाई को एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसमें राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच में हुई प्रगति का विस्तृत ब्योरा देने को कहा गया था।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि जांच के दौरान ईडी को ऐसी सामग्री या दस्तावेज मिलते हैं, जिनसे किसी तरह की गैरकानूनी गतिविधि का संकेत मिलता है, तो वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। हाई कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की गई थी। यह आदेश शिशिर की ओर से दाखिल आपराधिक रिट याचिका पर करीब दो घंटे तक चैंबर में चली सुनवाई के बाद पारित किया गया था।

राहुल गांधी ने इससे पहले हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें सीबीआई और ईडी को उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच और सत्यापन करने का निर्देश दिया गया था। शिशिर इससे पहले भी राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता रखने का आरोप लगाते हुए याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं।

गौरतलब है कि इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को राहुल गांधी के खिलाफ चल रही उस आपराधिक कार्यवाही को भी रद्द कर दिया था जिसमें राहुल गांधी ने विनायक दामोदर सावरकर को अंग्रेजों का सहयोगी बताया था। अदालत ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने लखनऊ के एक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को चुनौती देने वाली गांधी की याचिका स्वीकार कर ली है। पीठ ने गौर किया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए जरूरी मंजूरी दी गई थी।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हमने पक्षकारों के विद्वान वकीलों की दलीलें सुनी हैं। प्रतिवादी उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में मंजूरी दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। ऐसी स्थिति में मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेशों को रद्द किया जाता है।